छोटा सा कदम…

आज एक छोटा सा कदम बढ़ाया है
नन्हीं आँखों ने एक सपना नया सजाया है
उस मंजिल को हमदम अपना बनाया है
आज एक छोटा सा कदम बढ़ाया है

माँ कहती है, छोटे कदमों की पहुँच बड़ी होती है
क़दमों की लम्बाई नहीं, इंसान की सोच बड़ी होती है
बड़े क़दमों ने तो अक्सर रौंदा है यह जहां
छोटे छोटे कदम मिला ही बनता है कारवां

आज एक छोटा सा कदम बढ़ाया है
आँगन की मिट्टी से एक कच्चा पक्का गुल्लक बनाया है
उस गुल्लक को अपने सपनों के रंगों से सजाया है
आज एक छोटा सा कदम बढ़ाया है

माँ कहती है, गरीबी एक अभिशाप है
सब गुण निगल जाए, ऐसा भयानक सांप है
माँ, मगर सपने तो सब देखते होंगे
शायद गरीबों के सपने थोड़े मैले-कुचले होंगे

हमारे सपनों में ice-cream, chocolates होती है जहां
उनके सपनो में शायद रुखी सुखी सी रोटी हो वहां
माँ कहती है, अपने सपनों के पीछे तो भागते हैं सभी
किसी दूसरे के सपनें पूरे करो, सच्ची ख़ुशी मिलती है तभी

इसीलिए आज एक छोटा सा कदम बढ़ाया है
रोज़ गुल्लक में एक का सिक्का डालने का नियम बनाया है
प्रिया दीदी से एक साल का हिसाब लगवाया है
आज एक छोटा सा कदम बढ़ाया है

माँ कहती है, भूखे को खाना नहीं काम देना चाहिए
एक दिन का नहीं, रोज़ का इंतज़ाम देना चाहिये
३५० रुपये का आता है बूट पालिश का डब्बा
अगली दिवाली किसी को काली स्याही से रोशनी का ईनाम देना चाहिए

आज एक छोटा सा कदम बढ़ाया है
अपनी पुरानी किताबों पर जिल्द नया चढ़ाया है
अपने ड्राईवर के बेटे को २ का पहाड़ा पढ़ाया है
नन्हीं आँखों ने एक सपना नया सजाया है
आज एक छोटा सा कदम……..

6 responses to “छोटा सा कदम…

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