Just a few lines….

Just a collection of random lines I write* now and then…

बहुत दूर से चले आ रहे थे साथ हम
क्या पता था आखिरी मोड़ पर रास्ते बदल जायेंगे,
हजारों मील की दूरी में भी न पड़ सकी जो दरारें
क्या पता था एक ही शहर में यूँ फासले बढ़  जायेंगे.

बारिशों की राह देखते रहे हम
न जाने कब सैलाब सब कुछ बहा कर ले गया,
इन्द्रधनुष के रंगों में कुछ ऐसे उलझे हम
न जाने कब हमारी ज़िन्दगी का रंग भी उड़ा कर ले गया.

ज़िन्दगी  के   इम्तेहाँ  अकेले  दें  हम  कब  तलक
काश  कोई  हमसफ़र  होता  तो  cheating  कर  लेते ….

And here are a few lines from a very beautiful song from the movie Maachis(1996). Do listen to the female rendering of the song. It’s beautiful….

तुम  गए  सब  गया , तुम  गए  सब  गया
कोई  अपनी  ही  मिट्टी  तले  दब  गया
कोई  आया  था  कुछ   देर  पहले  यहाँ
लेके  मिट्टी  से  लेप  हुआ  आसमान
अब्र  पर  डालकर  वो   गया , कब  गया
तुम  गए  सब  गया , तुम  गए  सब  गया
हाथों  पैरों  में  तन्हाइयां  चलती  हैं
मेरी  आँखों  में  परछाइयां  चलती  हैं
एक  सैलाब  था  सारा  घर   बह  गया
फिर  भी  जीने  का  थोडा  सा  डर  रह  गया
ज़ख्म  जीने  के  क्यूं  दे  गया , जब  गया
तुम  गए  सब  गया , तुम  गए  सब  गया

3 responses to “Just a few lines….

  1. Well written.

    बारिशों की राह देखते रहे हम
    न जाने कब सैलाब सब कुछ बहा कर ले गया,

    Excellent lines.

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